The Last Letter

(From left) the late Aditya Birla, Kumar Mangalam Birla, the late G.D. Birla, Basant Birla. Very few people have had the wisdom to summarize their life experiences into a single-page.

Dear Basant, I advise you to read this letter when you become an adult and are older. I am writing from my experience. To be born as a human being in this world is a rare opportunity – this is true. One who abuses one’s body, having obtained the human form, is only an animal. You have received a lot of wealth and good resources. If these are used to serve others, then, of course, such resources will become useful. If not, they will become a devil”s weapon. Pay heed to these principle : 1 ) Never use wealth for luxury and cheap pleasure. Ravana had indulged in luxury and promiscuity; King Janaka had rendered service. Wealth is never eternal; therefore, so long as it lasts, use it for serving others. Use the least possible amount for yourself, the rest you should spend to alleviate the sorrows of suffering ones. 2 ) Wealth is power. Intoxicated by such power, one may act unjustly towards another – you must be careful about this. 3 ) Do leave this advice for your children; if they lead a life of comfort and luxury, then they would be committing sin and destroying our business activities. You must not bequeath wealth to such spoilt brats. Before it can reach them, distribute it to poor. You have to realise that you are the trustee of such wealth, and we brothers have generated this wealth in the hope that you will put it to good uses. 4) Remember always that you hold wealth on behalf of the common citizens. You cannot use it for your selfish ends. 5 ) Never forget God. He gives right understanding. 6 ) Keep your senses under control, otherwise they will drown you. 7 ) Physical exercise must be done regularly. 8 ) Control your consumption of food. Those who eat to please the palate die early and cannot work enough. Ghanshyam Das Birla.

घनश्यामदास जी बिड़ला का अपने पुत्र बसंत कुमार जी बिड़ला के नाम 1934 में लिखित एक अत्यंत प्रेरक पत्र जो हर एक को जरूर पढ़ना चाहिए : चि. बसंत, यह जो लिखता हूँ उसे बड़े होकर और बूढ़े होकर भी पढ़ना, अपने अनुभव की बात कहता हूँ। संसार में मनुष्य जन्म दुर्लभ है और मनुष्य जन्म पाकर जिसने शरीर का दुरुपयोग किया, वह पशु है। तुम्हारे पास धन है, तन्दुरुस्ती है, अच्छे साधन हैं, उनको सेवा के लिए उपयोग किया, तब तो साधन सफल है अन्यथा वे शैतान के औजार हैं। तुम इन बातों को ध्यान में रखना। धन का मौज-शौक में कभी उपयोग न करना, ऐसा नहीं की धन सदा रहेगा ही, इसलिए जितने दिन पास में है उसका उपयोग सेवा के लिए करो, अपने ऊपर कम से कम खर्च करो, बाकी जनकल्याण और दुखियों का दुख दूर करने में व्यय करो। धन शक्ति है, इस शक्ति के नशे में किसी के साथ अन्याय हो जाना संभव है, इसका ध्यान रखो की अपने धन के उपयोग से किसी पर अन्याय ना हो। अपनी संतान के लिए भी यही उपदेश छोड़कर जाओ। यदि बच्चे मौज-शौक, ऐश-आराम वाले होंगे तो पाप करेंगे और हमारे व्यापार को चौपट करेंगे। ऐसे नालायकों को धन कभी न देना, उनके हाथ में जाये उससे पहले ही जनकल्याण के किसी काम में लगा देना या गरीबों में बाँट देना। तुम उसे अपने मन के अंधेपन से संतान के मोह में स्वार्थ के लिए उपयोग नहीं कर सकते। हम भाइयों ने अपार मेहनत से व्यापार को बढ़ाया है तो यह समझकर कि वे लोग धन का सदुपयोग करेंगे ; भगवान को कभी न भूलना, वह अच्छी बुद्धि देता है, इन्द्रियों पर काबू रखना, वरना यह तुम्हें डुबो देगी। नित्य नियम से व्यायाम-योग करना। स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी सम्पदा है। स्वास्थ्य से कार्य में कुशलता आती है, कुशलता से कार्यसिद्धि और कार्यसिद्धि से समृद्धि आती है; सुख-समृद्धि के लिए स्वास्थ्य ही पहली शर्त है l मैंने देखा है की स्वास्थ्य सम्पदा से रहित होनेपर करोड़ों-अरबों के स्वामी भी कैसे दीन-हीन बनकर रह जाते हैं। स्वास्थ्य के अभाव में सुख-साधनों का कोई मूल्य नहीं। इस सम्पदा की रक्षा हर उपाय से करना। भोजन को दवा समझकर खाना। स्वाद के वश होकर खाते मत रहना। जीने के लिए खाना हैं, न कि खाने के लिए जीना । घनश्यामदास बिड़ला; नोट : श्री घनश्यामदास जी बिरला का अपने बेटे के नाम लिखा हुवा पत्र इतिहास के सर्वश्रेष्ठ पत्रों में से एक माना जाता है l विश्व में जो दो सबसे सुप्रसिद्ध और आदर्श पत्र माने गए है उनमें एक है ‘अब्राहम लिंकन का शिक्षक के नाम पत्र’ और दूसरा है ‘घनश्यामदास बिरला का पुत्र के नाम पत्र। (अग्रेषित सन्देश)

 

One thought on “The Last Letter

  1. It’s a wonderful initiative bhaiya…
    I guess I have browsed through most of the website…N have found some of the contents really interesting.
    Hope to keep reading more of it and more of you…Keep up the good work

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